फरीदाबाद, 18 फरवरी ( धमीजा ) : फरीदाबाद के पूर्व विधायक आनंद कौशिक का बुधवार को निधन हो गया। 75 वर्ष की आयु में उन्होंने सेक्टर-9 स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। दोपहर करीब दो बजे उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनकर कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ताओं का उनके घर जमावाड़ा लग गया। पूर्व विधायक करीब एक साल से बीमार चल रहे थे। बीमारी के कारण ही अब एक्टिव पॉलिटिक्स से भी दूरी बन गई थी।
पूर्व विधायक आनंद कौशिक पिछले करीब एक साल से बेड पर थे। बिस्तर पर डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। कई महीनों से आनंद कोमा जैसी स्थिति में चले गए थे।
पूर्व विधायक आनंद कौशिक के एक बेटा और तीन बेटियां हैं। वे मूल रूप से रोहतक के बोहर गांव के रहने वाले थे। बेटे विनोद कौशिक (एडवोकेट) फरीदाबाद सेक्टर 12 कोर्ट मे प्रैक्टिस करते हैं। अपने चाचा बलजीत कौशिक के साथ पॉलिटिक्स में भी एक्टिव हैं।
2009 में विधायक बने आनंद गांधी परिवार के करीबियों में रहे

आनंद कौशिक 2009 में कांग्रेस के टिकट पर फरीदाबाद विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। उन्होंने 2014 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। आनंद की संगठन और क्षेत्र में मजबूत पकड़ थी।
स्व कौशिक की गिनती गांधी परिवार के करीबियों में होती थी। लंबे समय तक राजीव गांधी और संजय गांधी से उनका जुड़ाव रहा। शुरुआत में उन्होंने पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। 1997 में कांग्रेस ने उन्हें हरियाणा प्रदेश का महासचिव नियुक्त किया था।
इसके अलावा आनंद कौशिक युवा कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। परिजनों का कहना है कि वे करीब एक साल से अस्वस्थ चल रहे थे। तब से ही एक्टिव पॉलिटिक्स से भी दूर हो गए थे।
छोटा भाई बलजीत कौशिक फरीदाबाद का जिलाध्यक्ष
उनके भाई बलजीत कौशिक वर्तमान में फरीदाबाद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हैं। करीब 6 माह पहले ही उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया था। उधर, राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा- आनंद कौशिक एक समर्पित, जुझारू और संगठन के प्रति निष्ठावान नेता थे। उन्होंने पार्टी और क्षेत्र की जनता की सेवा के लिए हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई।
2 बार हार झेली, बाद में सैलजा गुट थामा
आनंद कौशिक को कांग्रेस ने 2014 में फरीदाबाद से दोबारा टिकट दिया। उनके सामने बीजेपी ने विपुल गोयल को अपना प्रत्याशी बनाया था। कौशिक को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 2019 में कांग्रेस ने उन्हें बल्लभगढ़ सीट से मैदान में उतारा, मगर इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में बीजेपी के मूलचंद शर्मा ने जीत दर्ज की थी। वहीं, कुमारी सैलजा के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद उन्हें सैलजा का करीबी माना जाने लगा।
