लंबे इंतज़ार के बाद भाजपा ने डॉ अर्चना गुप्ता को बनाया प्रदेश अध्यक्ष, मोहनलाल बढ़ौली की हुई छुट्टी, डॉ अर्चना पर मनोहरलाल खट्टर का रहा है आशीर्वाद 

चंडीगढ़ , 28 मई ( नवीन धमीजा ) : लम्बे समय के इंतज़ार व जद्दोजहद के बाद हरियाणा में भाजपा ने नया प्रदेशाध्यक्ष घोषित कर दिया है। पानीपत की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना गुप्ता की ताजपोशी की गई है। हरियाणा में लगभग 43 साल बाद कोई महिला हरियाणा BJP की अध्यक्ष बनी हैं। इनसे पहले 1980 में डॉ. कमला वर्मा हरियाणा में पार्टी की पहली महिला अध्यक्ष बनीं थी।

पहले माना जा रहा था कि मोहनलाल बड़ौली को ही दोबारा मौका मिल सकता है। वह लगातार CM नायब सैनी के साथ नजर आते थे। जब उन्हें बदलने की तैयारी हुई तो डॉ. अर्चना गुप्ता के अलावा अंबाला से पूर्व मंत्री असीम गोयल के नाम पर भी चर्चा हुई।

गोयल को सीएम नायब सैनी का करीबी माना जाता है। वहीं, अर्चना गुप्ता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और संगठन की करीबी मानी जाती हैं। अर्चना गुप्ता गोल्ड मेडलिस्ट रेडियोलॉजिस्ट (MBBS, MD) हैं। राजनीति में आने से पहले विश्व हिंदू परिषद की इंडियन हेल्थ लाइन में सक्रिय थीं।

अध्यक्ष बनने के बाद अर्चना गुप्ता ने एक मंझे हुए राजनेता की तरह निवर्तमान अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली से मोबाइल पर बात की। उन्होंने कहा-

“नमस्कार अध्यक्ष जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। ये आपका ही लगाया हुआ पौधा है। “
सीएम नायब सैनी ने कहा-अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर पूरे प्रदेश के संगठन में नई ऊर्जा संचारित होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद, जिन्होंने हरियाणा की बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए अग्रणी भूमिका निभाई। 

अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की रणनीति 

डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। एक तो पार्टी कई बार महामंत्री को तरक्की देकर अध्यक्ष पद देने की परंपरा पर काम कर रही है। मोहनलाल बड़ौली भी अध्यक्ष बनने से महामंत्री रहे। उनसे पहले नायब सैनी भी अध्यक्ष बनने से पहले महामंत्री रहे।

दूसरी वजह, ये है कि वैश्य समाज को भाजपा का कैडर वोटर माना जाता है। खासकर शहरी इलाकों में यह वोटर निर्णायक है। इस वक्त वैश्य कोटे से सिर्फ विपुल गोयल ही कैबिनेट मंत्री हैं।

अर्चना गुप्ता की संगठन में पकड़ है और केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल के साथ भी बेहतर रिश्ते हैं। वैसे भी भाजपा महिला रिजर्वेशन बिल को लेकर माहौल बनाने में लगी थी। तब अर्चना गुप्ता को ही जगह-जगह बैठकें करने की जिम्मेदारी दी गई।

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